बुधवार, 7 जुलाई 2010

यूँ न अब दिल उछाल.....

यूँ न अब दिल उछाल कर चलना
जब चलो देख-भाल कर चलना।

आजकल मुफ्त कुछ नहीं मिलता
माल मुट्ठी में डाल कर चलना।

दोगले मोड़ पर नहीं आना
राह सीधी निकाल कर चलना।

जिंदगी और पास आएगी
मौत का साथ टाल कर चलना।

लोग उलटे जवाब देते हैं
कर सको तो सवाल कर चलना.

3 टिप्‍पणियां:

  1. तीसरा शेर --निकाल कर, आखिरी शेर देखो, कहीं संभाल कर चलना तो नही? लो मैं भी कहता हूं--

    जब चलो कारवां भी साथ चले
    एक पत्थर उछाल कर चलना

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